Nagaur: साढे़ सोलहपंथी जैन मंदिर, यह नाम आपको चौंकाता नहीं? देखें रोचक इतिहास व नाम का रहस्य

बीस पंथी पूजा, अभिषेक आदि में सांकेतिक अष्टद्रव्यों के बजाय असली फूल, फल, केसर आदि का उपयोग करते हैं. पंचामृत अभिषेक में असली द्रव्य यानी दूध, घी, दही आदि से भगवान को भोग लगाते हैं. बीसपंथी अनुनायी पूजा पद्धति में विश्वास रखते हैं. बताया जाता है कि पुराने समय में देश में भट्टरकों के 20 ठिकाने थे इसलिए ये बीसपंथी कहलाने लगे. इनसे अलग विचार तेरहपंथियों ने अपनाया.

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