महिला ने काटे बाल, जलाए हिजाब… महसा अमिनी की मौत के बाद ईरान में औरतों का महा-प्रदर्शन

महिला ने काटे बाल, जलाए हिजाब

रविवार को ईरान की मोरल पुलिस ने 22 साल की लड़की महसा अमिनी को हिजाब नहीं पहनने की वजह से हिरासत में लिया था और परिवारवालों का आरोप है, कि हिरासत में पुलिस ने महसा को काफी टॉर्चर किया था और उसके सिर में मारा गया, जिसके बाद वो कोमा में चली गई थी और 3 दिनों के बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई। महसा की मौत के बाद पूरे ईरान में महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्हें यूथ का समर्थन मिल रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं ने हिजाब को जलाना शुरू कर दिया है और कई महिलाओं ने विरोध का प्रदर्शन करने के लिए अपने बाल भी काट लिए हैं। ईरान में महिलाओं के हिजाब पहनना अनिवार्य है और ऐसा नहीं करने पर सजा का प्रावधान है और रविवार दोपहर की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सरकार ने 16 हजार महिलाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, लेकिन हजारों महिलाएं और सड़कों पर उतर चुकी हैं, जो कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं और हिजाब की अनिवार्यता खत्म करने के साथ साथ अपना अधिकार मांग रही हैं।

कट्टर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

ईरानी की प्रसिद्ध पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर महिलाओं के बाल काटते हुए एक वीडियो साझा किया और लिखा है कि, “हिजाब पुलिस द्वारा महसा की हत्या के विरोध में ईरानी महिलाएं अपने बाल काटकर और हिजाब जलाकर अपना गुस्सा दिखा रही हैं।” उन्होंने लिखा है कि, “7 साल की उम्र से अगर हम अपने बालों को नहीं ढकते हैं, तो हम स्कूल नहीं जा पाएंगे या नौकरी नहीं पा सकेंगे। हम इस लैंगिक रंगभेद व्यवस्था से तंग आ चुके हैं।” वहीं, एक अन्य ट्वीट में एक और ईरानी पत्रकार ने तेहरान विश्वविद्यालय के दृश्य साझा किए हैं और कहा है कि, विश्वविद्यालय के छात्र महसा अमिनी की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए हैं और उनके दिल में कट्टर सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा है।

पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू

पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू

महिला पत्रकार अलीनेजाद ने एक ट्वीट में कहा कि, “कल सुरक्षा बलों ने साघेज शहर में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं थीं, लेकिन अब राजधानी तेहरान भी विरोध में शामिल हो गया है।” उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि, “बहादुर महिलाओं” ने लगातार दूसरे दिन भी सड़कों पर धावा बोला है और उन्होंने लिखा है, बहादुर महिलाओं “डरो मत, हम सब एकजुट हैं।” उन्होंने यह भी लिखा है, कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, लेकिन फिर भी गलत काम करने वालों के खिलाफ लोग चुप नहीं रहेंगे और ये आवाज नहीं थमने वाली है। वहीं, अल जज़ीरा के अनुसार 22 साल की महसा अमीनी को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उस वक्त वो अपने परिवार के साथ राजधानी घुमने के लिए आईं थीं और पुलिस हिरासत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनके सिर पर गंभीर चोटों के निशान थे। वहीं, तेहरान पुलिस ने 22 साल की लड़की की मौत की पुष्टि की और पुलिस की तरफ से कहा गया, कि महसा अमीनी के बॉडी को जांच के लिए भेजा गया है।

महसा के परिवार ने क्या कहा?

महसा के परिवार ने क्या कहा?

सीएनएन ने ईरानवायर के हवाले से बताया कि, परिवार से बात करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि पुलिस ने अमिनी को पकड़ लिया था और उसे एक पुलिस वाहन के अंदर जबरदस्ती बिठाया गया था। इस दौरान उसके भाई ने पुलिस का विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने कहा था, कि उसकी बहन को इस्लाम की फिर से शिक्षा देने के लिए एक घंटे के लिए पुलिस स्टेशन ले जा रहे हैं, क्योंकि वो भटक गई है। पुलिस ने कहा कि, ग्रेटर ईरान में मार्गदर्शन के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा, जिसके बाद परिवार पुलिस स्टेशन के बाहर इंतजार करने लगा। लेकिन, कुछ देर बाद परिवार ने एक एंबुलेंस को पुलिस स्टेशन के अंदर जाते देखा, जिसमें महसा अमीनी को लादकर अस्पताल ले जाया गया। वहीं, पुलिस ने शुरू में कहा कि, पूछताछ के दौरान महसा को दिल का दौरा पड़ा था, इसीलिए उसे अस्पताल ले जाया गया है, लेकिन अस्पताल जाकर पता चला, कि महसा के सिर में गंभीर चोट है और वो कोमा में चली गई है।

पूरी तरह स्वस्थ थी महसा

पूरी तरह स्वस्थ थी महसा

महसा के परिवार ने कहा कि, उसे दिल से संबंधित कोई बीमारी नहीं थी और असल में वो बिल्कुल स्वस्थ थी। वहीं, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि, “22 वर्षीय युवती महसा अमिनी की हिरासत में संदिग्ध मौत के कारण जिन परिस्थितियों में हिरासत में यातना और अन्य दुर्व्यवहार के आरोप शामिल हैं, उनकी आपराधिक जांच होनी चाहिए।” इसमें कहा गया है कि, “तेहरान में तथाकथित ‘नैतिक पुलिस’ ने तीन दिन पहले महसा को गिरफ्तार किया था और ये गिरफ्तारी मनमानी और अपमानजनक थी। उसे जबरन सिर ढंकने के लिए कहा गया, लिहाजा इसमें शामिल सभी एजेंट्स और जिम्मेदारों को इंसाफ का सामना करना चाहिए। वहीं, महसा की मौत सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई है और ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने आंतरिक मंत्री को मामले की जांच शुरू करने का आदेश दिया।

संसद में उठाया जाएगा मामला

वहीं, अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ईरानी सांसदों ने कहा कि, वे इस मामले को संसद में उठाएंगे, वहीं, ईरान की अदालत ने कहा है कि, वो महसा की मौत की जांच के लिए एक विशेष फोर्स का गठन करेगी। अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, ईरान की गश्त-ए इरशाद (मार्गदर्शन गश्ती) के रूप में जानी जाने वाली नैतिकता पुलिस के आचरण को लेकर ईरान के अंदर और बाहर लगातार विरोध बढ़ रहा है और इसके ऊपर महिलाओं से दुर्ववहार करने के पहले भी आरोप लगे हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में सभी जाति और धर्मों के लिए अनिवार्य ड्रेस कोड लागू है और गैर-मुसलमानों को भी पूरी तरह से सिर ढंकना होगा। कानून में ये भी कहा गया है, कि महिलाओं को हिजाब से अपने सिर को इस तरह से ढंकना होगा, कि उनके बाल नहीं दिखे। वहीं, एक स्कार्फ से गर्दन छिपाने की भी अनिवार्यता है। ईरान की कट्टरपंथी सरकार ने देश को दसियों साल पीछे धकेल दिया है और ईरान में हिजाब के खिलाफ पिछले कई सालों से महिलाएं आवाज उठा रही हैं।



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